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चंद्रकांत पंडित: कप्तान के रूप में जो ख्वाहिश 23 साल पहले रह गई थी अधूरी, वो कोच के रूप में होगी पूरी


नई दिल्ली. मध्य प्रदेश 23 साल बाद रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचा है. उसने पहले सेमीफाइनल में बंगाल को हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट कटाया है. काफी लोगों के लिए यह महज एक खबर भर हो सकती है. लेकिन, मध्य प्रदेश की क्रिकेट टीम और उसके कोच चंद्रकांत पंडित के लिए यह इतिहास रचने के साथ बदलने का मौका है. मध्य प्रदेश की टीम पिछली बार 1998-99 में रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचीं थी. तब टीम के कप्तान चंद्रकांत पंडित ही थे. लेकिन, उनकी कप्तानी में मध्य प्रदेश का रणजी ट्रॉफी जीतने का सपना कर्नाटक ने तोड़ दिया था. तब फाइनल में कर्नाटक ने मध्य प्रदेश को 96 रन से हराया था. इस बार वही चंद्रकांत एमपी टीम के कोच हैं. 23 साल पहले कप्तान के रूप में उनकी जो ख्वाहिश अधूरी रह गई थी, अब कोच के रूप में उसे पूरा करने पर नजर है.

चंद्रकांत पंडित 2 साल पहले ही मध्य प्रदेश की क्रिकेट टीम के कोच बने थे. उन्हें मोटी कीमत देकर टीम का कोच बनाया गया था. शुरुआत में नतीजे पक्ष में नहीं आए तो खूब हो-हल्ला भी मचा. पंडित की काफी आलोचना भी हुई. लेकिन, वो चुपचाप टीम तैयार करने में लगे रहे. टीम में कई ऐसे खिलाड़ी थे, जिनका कद और नाम बड़ा था. लेकिन वो पंडित की प्लानिंग में फिट नहीं बैठते थे तो उनमें से कुछ को बाहर कर दिया और कुछ खुद ही टीम से अलग हो गए. इसके बाद उन्होंने नए खिलाड़ियों को मौका दिया और संदेश सीधा सा… अनुशासन से कोई समझौता नहीं. बस, उनकी यही सख्ती और अनुशासन का फॉर्मूला काम कर गया और जो टीम 6 साल से क्वार्टर फाइनल में नहीं पहुंच पा रही थी वो सेमीफाइनल में पहुंचीं और अब फाइनल खेलेगी.

चंद्रकांत पंडित सख्त मिजाज कोच माने जाते हैं
चंद्रकांत पंडित की गिनती घरेलू क्रिकेट के बेस्ट कोच के रूप में होती है. वो सख्त मिजाज माने जाते हैं. यही उनकी सफलता का फॉर्मूला भी है. उन्होंने मध्य प्रदेश का कोच बनने के बाद टीम की तैयारियों में कई बदलाव किए. शुरू में तो खिलाड़ियों को भी यह रास नहीं आया. लेकिन, जब नतीजे टीम के हक में आने लगे तो फिर सारी बातें पीछे छूट गईं. एमपी टीम के खिलाड़ियों को टीम बस से उतरते ही अपने मोबाइल जमा कराने होते हैं. प्रैक्टिस से लौटने के बाद बस में ही उन्हें मोबाइल मिलता है.

कोच चंद्रकांत ने ऐसा इसलिए किया, ताकि खिलाड़ियों का ध्यान सिर्फ खेल पर रहे, बाहर क्या हो रहा है, वो उससे दूर रहें. इतना ही नहीं, प्रैक्टिस और मैच शुरू होने से पहले पूरी टीम एक साथ मेडिटेशन करती है और टीम में एकरूपता लाने के लिए सबको एक जैसे कपड़े पहनने होते हैं. देखने में तो यह बातें, छोटी हैं, लेकिन टीम तैयार करने का चंद्रकांत पंडित का यह सालों पुराना फॉर्मूला है और यह सफल भी रहा है.

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विदर्भ को लगातार 2 साल रणजी ट्रॉफी का चैम्पियन बनाया
इसका सबूत है कोच के रूप में चंद्रकांत पंडित का ट्रैक रिकॉर्ड. उनके कोच रहते विदर्भ जैसी टीम लगातार 2 साल 2017-18 और 2018-19 में रणजी चैम्पियन बनी थी. विदर्भ से पहले वो मुंबई टीम के कोच थे और उनकी कोचिंग में ही मुंबई ने 2016 में रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था. बस, यही इरादा लेकर चंद्रकांत पंडित मध्य प्रदेश की टीम से जुड़े और उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं? वो इसे लेकर एक बार कह भी चुके हैं कि मैं किसी खिलाड़ी को थप्पड़ भी मार सकता हूं. लेकिन, उसके पीछे वजह होगी और वो खिलाड़ी भी इस बात को समझेगा. इससे पता चलता है कि एक कोच के तौर पर वो अपने तौर-तरीकों को लेकर बिल्कुल साफ हैं.

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फाइनल में मुंबई के दो पूर्व खिलाड़ियों की टक्कर
रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मध्य प्रदेश की टक्कर रिकॉर्ड 47वीं बार फाइनल में जगह बनाने वाली टीम मुंबई से होगी. मुंबई ने उत्तर प्रदेश के खिलाफ पहली पारी में बढ़त के आधार पर फाइनल में जगह बनाई है. रणजी ट्रॉफी का फाइनल इसलिए भी दिलचस्प होगा, क्योंकि इस मैच में सिर्फ दो टीमों की ही टक्कर नहीं होगी, बल्कि मुंबई के दो पूर्व खिलाड़ी भी एक-दूसरे से जोर आजमाइश करेंगे. एक तरफ होंगे मुंबई के मौजूदा कोच अमोल मजूमदार और दूसरी तरफ होंगे पूर्व कोच चंद्रकांत पंडित. बता दें कि पंडित की कोचिंग में मुंबई रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत चुकी है और अमोल एक खिलाड़ी के तौर पर चंद्रकांत की कोचिंग में खेल चुके हैं.

Tags: Cricket news, Madhya pradesh news, Mumbai, Ranji Trophy



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