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Weird Tradition: यहां बच्चियों के बांध दिए जाते थे पैर, भंयकर दर्द देकर मर्दों को खुश करना था कारण


दुनिया में हर देश की अपनी मान्यताएं होती हैं मगर कुछ इतनी अजीबोगरीब होती हैं कि जब उनके बारे में दूसरे देश के लोगों को पता चलता है तो उनकी रूह कांप जाती है. कई मान्यताएं भले ही अब खत्म हो गई हों मगर उनका इतिहास के पन्नों में वो आज भी दर्ज हैं और लोगों को चौंकाते हैं. ऐसा ही एक रिवाज चीन में होता था जहां छोटी बच्चियों के पैर बांध (Foot binding tradition in China) दिए जाते थे.

पैर बांधने (Chinese foot binding weird tradition) की इस प्रक्रिया को कमल जैसे पैर (Lotus feet) हासिल करने के लिए किया जाता था. कई सदियों से ये रिवाज चीन में चला आ रहा है. ब्रिटैनिका वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार 10वीं शताब्दी में इस रिवाज की शुरुआत हुई. जब लड़कियां 4 से 6 साल की होती थीं तो उनके पैर बैंडेज से बांध (foot bind with bandage) दिए जाते थे. हैरानी की बात तो ये है कि 3 साल तक की छोटी बच्चियों से लेकर 12 साल तक की बच्चियों पर भी ये अत्याचार किया जाता था.

मर्दों को खुश करने के लिए बांध दिए जाते थे पैर
पैर की 4 उंगलियों को मोड़कर तलवे के अंदर की तरफ मोड़ दिया जाता था जिससे पैर आगे से नुकीला नजर आए. ये बेहद दर्दनाक प्रक्रिया होती थी. बीच-बीच में बैंडेज खोलकर पैर की सफाई की जाती थी और खून, पस, फोड़ा आदी जैसी चीजों को साफ कर उसे फिर से बांध देते थे. अब सवाल ये उठता है कि ऐसा क्यों किया जाता था. रिपोर्ट्स की मानें तो उस दौरान मर्दों को छोटे और नुकीले पैर पसंद हुआ करते थे. इस वजह से महिलाओं के लिए आगे से नुकीले जूते बनाए जाते थे. दूसरा कारण ये था कि पैर मौड़ देने से खून का बहाव प्राइवेट पार्ट्स की तरफ, नीचे से ऊपर की ओर होता था. इस तरह औरतें संबंध बनाने में ज्यादा एक्टिव हो जाती थीं. कुल मिलाकर ये पूरी प्रक्रिया मर्दों की खुशी के लिए की जाती थी.

1949 में खत्म हो गई प्रथा
इस रिवाज से महिलाओं को यौवनावस्था, महावरी और मां बनने के लिए तैयार किया जाता था. दूसरा ये कि ये रिवाज दर्शाता था कि महिलाएं आज्ञाकारी होती हैं तो वो पति से दबकर रहेंगी. मां, दादी या घर की अन्य महिलाएं इस प्रथा को अंजाम दिया करती थी. हैरानी की बात तो ये भी है कि इस प्रथा से अपंग होने का खतरा बढ़ जाता था. साथ ही गैंगरीन, अल्सर, या मौत होने का भी डर था. हालांकि, इस मौत होने के मामले बेहद दुर्लभ माने जाते थे. साल 1662 में क्विंग साम्रज्य ने इस प्रथा को बैन कर दिया था मगर लोग इसके बावजूद भी ऐसा कर रहे थे तो 1668 में बैन को हटा लिया गया. साल 1949 में जब पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का निर्माण हुआ तब इस प्रथा को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया.

Tags: Ajab Gajab news, Weird news



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