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ताइवान को लेकर जो बाइडन की धमकी से बौखलाया चीन, कहा- हमें कम आंकने की गलती न करें


नई दिल्ली: जापान की यात्रा पर पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में ताइवान मुद्दे पर चीन को कड़ी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि यदि चीन, ताइवान के खिलाफ बल प्रयोग करता है, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करेगा. जो बाइडन ने कहा, ‘हम वन चाइना पॉलिसी को लेकर सहमत हैं. हमने इस नीति पर हस्ताक्षर किया है. लेकिन ताइवान को बलपूर्वक चीन में शामिल नहीं किया जा सकता है. यह अनुचित होगा.’

चीन ने जो बाइडन की इस टिप्पणी पर सख्त एतराज जताया है. विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि वह अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता के मामले में कोई समझौता नहीं करेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि चीनी नागरिकों के संकल्प को कोई कमतर आंकने करने की गलती ना करे. वांग यी ने कहा, ‘ताइवान चीनी क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है और यह पूरी तरह से चीन का आंतरिक विषय है, जिसमें किसी विदेशी हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है.’

चीन के विदेश मंत्री ने जो बाइडन की टिप्पणी पर क्या कहा?
वांग यी ने कहा, ‘चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सहित देश के मुख्य हितों के मुद्दों पर समझौता या रियायत की कोई गुंजाइश नहीं है. चीन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए ठोस कार्रवाई करेगा. ताइवान का मुद्दा और यूक्रेन का मुद्दा पूरी तरह से अलग है. उनकी तुलना करना बेतुका है.’ उन्होंने अमेरिका से ‘एक चीन नीति’ का सम्मान करने का आग्रह किया.

ताइवान का चीन की मुख्य भूमि के साथ एकीकरण करना राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक बड़ा राजनीतिक वादा है. उन्होंने कहा है कि ताइवान के साथ चीन का फिर से एकीकरण जरूर होगा. उन्होंने यह लक्ष्य पाने के लिए ताकत का इस्तेमाल करने की संभावनाओं को खारिज नहीं किया है. ताइवान दक्षिण पूर्वी चीन के तट से करीब 100 मील दूर स्थित एक द्वीप है. यह ‘पहली द्वीप शृंखला’ में मौजूद है, जिसमें अमेरिका समर्थक कई देश स्थित हैं.

अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ताइवान की स्वतंत्रता?
अमेरिका की विदेश नीति के लिहाज से ये सभी द्वीप काफी अहम हैं. चीन यदि ताइवान पर कब्जा कर लेता है तो, पश्चिमी प्रशांत महासागर में उसका दबदबा हो जाएगा. इससे गुआम और हवाई द्वीपों पर मौजूद अमेरिकी सै​न्य ठिकाने को भी खतरा हो सकता है. हालांकि, चीन का दावा है कि उसके इरादे पूरी तरह से शांतिपूर्ण हैं. चीन मानता है कि ताइवान उसका एक प्रांत है, जो अंतत: एक दिन फिर से उसका हिस्सा बन जाएगा. दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक आजाद मुल्क मानता है. ताइवान का अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है.

दुनिया के सिर्फ 13 देश ताइवान को मानते हैं संप्रभु राष्ट्र
फिलहाल दुनिया के केवल 13 देश ताइवान को एक अलग और संप्रभु देश मानते हैं. चीन दूसरे देशों पर ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता न देने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाता है. चीन की यह कोशिश होती है कि दूसरे देश कुछ ऐसा न करें, जिससे ताइवान को आजाद मुल्क की पहचान मिले. ताइवान के रक्षा मंत्री ने हाल ही में कहा था कि चीन के साथ उनके संबंध पिछले 40 सालों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. बीते कुछ वर्षों में ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में चीनी लड़ाकू विमानों ने उड़ानें भरी हैं. ताइवान इस पर आपत्ति दर्ज कराता आ रहा है.

दुनिया के लिए क्यों जरूरी है ताइवान का स्वशासित रहना?
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, गेमिंग उपकरणों में जो चिप लगते हैं, सबसे ज्यादा ताइवान में बनते हैं. इसके अलावा मोबाइल फोन की बैटरी, ईयर फोन इत्यादि का भी ताइवान में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. चिप के मामले में ताइवान फिलहाल दुनिया की बहुत बड़ी जरूरत है. यहां की ‘वन मेजर’ कंपनी अकेले दुनिया के आधे से अधिक चिप का उत्पादन करती है. दुनिया का चिप उद्योग 2021 में करीब 100 अरब डॉलर का था और इस पर ताइवान का दबदबा है. यदि ताइवान पर चीन का कब्जा हो गया तो दुनिया के इतने अहम उद्योग पर चीन का नियंत्रण हो जाएगा.

Tags: America, China, China-Taiwan





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