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जानिए, हॉकी के लिए कितना जरूरी है जुंबा, नई लड़कियों को क्यों दी जाती है जुंबा की ट्रेनिंग


रांची. झारखंड में हॉकी की सफलता की चर्चा अक्सर लोगों को लुभाती है लेकिन इस चर्चा के पीछे जो मेहनत का जो फलसफा छिपा होता है, उसका नाम है जुंबा. आमतौर पर हॉकी को जानने वाले लोगों ने भी जुंबा का नाम नहीं सुना होगा क्योंकि जुंबा परदे के पीछे की वह मेहनत है जो हॉकी के मैदान पर दिखाई देती है. दुनिया कहती है कि झारखंड की नसों में हॉकी दौड़ता है. ऐसी हॉकी जो खेली तो मैदान पर जाती है लेकिन चर्चा जुबां पर आ जाती है.

दुनिया भर में खेले जाने वाले इस खेल में हॉकी के साथ जुंबा की चर्चा जरूरी हो जाती है. दरअसल जुंबा एक विशेष तरह की एरोबिक एक्सासाइज है जो हॉकी के खेल में बेहद जरूरी मानी जाती है क्योंकि इस एक्सासाइज में पैर और कमर से लेकर शरीर के पूरे हिस्से को फिट रखने की कोशिश की जाती है. म्यूजिक के सहारे दिया जाने वाला यह प्रशिक्षण प्रशिक्षु हॉकी खिलाड़ियों को दिया जाता है जो छोटी उम्र में हॉकी की दुनिया में आने का इरादा रखती है. रांची के बरियातू हॉकी प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग ले रही करीब 25 प्रशिक्षु खिलाड़ियों का जुंबा का पाठ पढ़ाया जा रहा है.

खूंटी के तोरपा की रहनेवाली ऋचा टोपनो महज 12 वर्ष की है. उसने हॉकी में अपना करियर बनाने का इरादा बनाया और रांची के बरियातू हॉकी सेंटर पहुंची है. ऋचा बताती है कि कोच हॉकी के मैदान में जाने से पहले जुंबा की एक्सासाइज कराती हैं ताकि बॉडी में लचीलापन बना रहे. सिमडेगा की 11 साल की रेनी टोपनो बताती है कि वह आदिवासी बेटी है और उसे जुंबा के तौर पर अपने परंपरागत गीत संगीत पर जुंबा करना बेहद पसंद है.

दरअसल हॉकी कमर के नीचे झुककर खेली जाती है. इसमें गेंद के साथ-साथ मैदान में विरोधी खिलाड़ियों के मूवमेंट पर ध्यान रखना होता है लिहाजा जुंबा की ट्रेनिंग जरूरी हो जाती है. बरियातू हॉकी सेंटर की नेशनल कोच करुणा पूर्ति बताती हैं कि नये खिलाड़ियों को जुंबा के तहत फिटनेस का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि खिलाड़ियों की फिटनेस और मूवमेंट शुरुआत से बनी रहे. जुंबा से शरीर से अतिरिक्त फैट भी निकल जाता है.

झारखंड में किया जाना वाला जुंबा दुनिया भर से थोड़ा अलग होता है क्योंकि यहां की आदिवासी संस्कृति में भी गीत-संगीत को बड़ी अहमियत दी गयी है. आदिवासी नाच गानों में पैरों का थिरकना और उनका कदमताल हॉकी के लिए परफेक्ट माना जाता है, शायद यही वजह है कि झारखंड की बेटियों के मैदान में मूवमेंट दूसरों की तुलना में कुदरती होते है. वैसे अभ्यास के लिए कोच विदेशी एरोबिक म्यूजिक पर भी खिलाड़ियों का अभ्यास कराते हैं.

Tags: Hockey News, Jharkhand news



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