ऑटो ड्राइवर पिता के सपने को बेटे ने कर दिखाया सच, इतिहास रचकर फुटबॉल सेंसेशन बने जेसिन टीके


नई दिल्ली. किसी पिता के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी? यही न कि जो सपना उन्होंने कभी खुद के लिए देखा था, उसे बेटा साकार कर दे. ऐसा ही कुछ केरल के ऑटो ड्राइवर मोहम्मद निसार के साथ हुआ. वो खुद फुटबॉलर बनने चाहते थे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. लेकिन बेटे जेसिन टीके ने इस सपने को सच कर दिखाया और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा दिया. केरल के स्ट्राइकर जेसिन टीके ने हाल ही में संतोष ट्रॉफी के सेमीफाइनल में कर्नाटक के खिलाफ बतौर सब्सिट्यूट मैदान पर उतरकर 5 गोल दागे. जेसिन के इस दमदार खेल की बदौलत केरल ने कर्नाटक को 7-3 से हराया था.

जेसिन संतोष ट्रॉफी के इतिहास में एक सब्सिट्यूट के रूप में पांच गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बने. इसके साथ ही केरल के लिए नेशनल फुटबॉल चैम्पियनशिप के किसी एक मैच में सबसे अधिक गोल करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. इससे पहले, यह उपलब्धि आसिफ साहिर के नाम थी. उन्होंने 1999 में बिहार के खिलाफ मैच में 4 गोल दागे थे.

जेसिन के पिता ऑटो चलाते हैं
जेसिन के पिता मोहम्मद निसार, जो पेशे से ऑटो ड्राइवर हैं, उन्होंने स्टेडियम में सेमीफाइनल मैच देखने की पूरी तैयारी कर रखी थी. लेकिन वो मैच शुरू होने से पहले अपना काम खत्म नहीं कर पाए. स्टेडियम घर से 30 किमी दूर था. ऐसे में वो स्टेडियम में बैठकर बेटे को इतिहास रचते नहीं देख पाए. उन्होंने यह मैच मोबाइल पर देखा. अब संतोष ट्रॉफी के फाइनल में केरल की टक्कर बंगाल से है. इस बार जेसिन के पिता पिछली गलती नहीं दोहराएंगे और दिन में ही काम खत्म करके पूरे परिवार के साथ बेटे का मैच देखने के लिए स्टेडियम जाएंगे. उनके लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा दिन है.

मैं खुद फुटबॉलर बनना चाहता था: जेसिन के पिता
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जेसिन के पिता मोहम्मद निसार ने कहा, “मैं खुद एक फुटबॉलर बनना चाहता था. लेकिन मेरा ध्यान केंद्रित नहीं था. मैं एथलेटिक्स, बास्केटबॉल और कबड्डी जैसे अलग-अलग स्पोर्ट्स खेलता रहा और अंत में किसी में भी अपना करियर नहीं बना पाया. मुझे सही रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं था. जेसिन भी एथलेटिक्स में भी अच्छा था. लेकिन मैंने अपने बेटे को एक सलाह दी थी कि वह एक वक्त में सिर्फ एक चीज पर ध्यान केंद्रित करे और मुझे खुशी है कि वह फुटबॉल से जुड़ा रहा.”

दादी भी जेसिन को फुटबॉलर बनाना चाहती थीं
जेसिन के फुटबॉलर बनने में दादी की भूमिका भी अहम रही. पिता ने बताया,”जब जेसिन बच्चा था, तो ऑटो चलाकर मेरी इतनी कमाई नहीं होती थी कि मैं घर चला सकूं. इसके बाद मैं काम के सिलसिले में खाड़ी देश में चला गया. वहां मैंने कई साल नौकरी की. इस दौरान मेरी मां यानी जेसिन की दादी उसे रोज फुटबॉल एकेडमी लेकर जाती थी. वह चाहती थी कि जेसिन भी मेरे जैसा फुटबॉलर बने. दुर्भाग्य से, जब वह आठवीं क्लास में था, तब उनकी मौत हो गई. अगर वो आज रहती तो सबसे ज्यादा खुश होती.”

जेसिन ने 15 मिनट के भीतर 3 गोल दागे
कर्नाटक के खिलाफ संतोष ट्रॉफी के सेमीफाइनल में जेसिन को 30वें मिनट में मैदान पर उतारा गया था, तब मेजबान टीम एक गोल से पीछे चल रही थी. चार मिनट के भीतर ही, जेसिन ने गोल ठोककर स्कोर बराबर कर दिया. इसके बाद 42वें और फिर 44वें मिनट में दो और गोल दागकर मैच में अपनी हैट्रिक पूरी की. दूसरे हाफ में जेसिन ने दो और गोल ठोकते हुए केरल को फाइनल में पहुंचा दिया.

मेरे यहां तक पहुंचने में कोच की अहम भूमिका: जेसिन
केरल यूनाइटेड के लिए खेलने वाले जेसिन ने कहा, “मैं कभी भी किसी जिले की टीम का हिस्सा नहीं रहा. लेकिन केरल के कोच बिनो जॉर्ज ने मुझे आगे बढ़ने के मौके दिए. मैं आई-लीग सेकेंड डिवीजन, केरल प्रीमियर लीग और अब संतोष ट्रॉफी खेल रहा हूं, तो इसमें मेरे कोच की अहम भूमिका है.”

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फाइनल में केरल की टक्कर बंगाल से
फाइनल को लेकर जेसिन ने कहा कि हम ग्रुप स्टेज (2-0) में पहले ही पश्चिम बंगाल को हरा चुके हैं. हम जानते हैं कि वे कैसे खेलते हैं और अगर हम अपनी क्षमता से खेलते हैं, तो मुझे यकीन है कि हम फाइनल भी जीत सकते हैं. उम्मीद है कि मैं एक बार फिर सुपर-सब बन सकता हूं.

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