Evergrande crisis what is the meaning of the fall of chinese company what will be its effect on other countries


बीजिंग. सालों में ऐसी कोई एक कंपनी तैयार होती और इतनी बड़ी हो जाती है कि सरकार के मन में भी डर पैदा कर देती हैं. उन्हें लगता है कि कंपनी असफल होती है, तो व्यापक अर्थव्यवस्था (Economy) का हाल क्या होगा. इसी तरह का एक उदाहरण चीन (China) की रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रैंड (Evergrande) है, जिसे दुनिया की सबसे ज्यादा कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी भी कहा जा रहा है. चीन से उठा मुद्दा कई देशों के लिए आर्थिक चिंता का कारण बन गया है. आंकड़े बताते हैं कि कंपनी 30 हजार करोड़ डॉलर से ज्यादा कर्ज में डूबी हुई है, कंपनी के कई प्रोजेक्ट्स बीच में अटके हुए हैं और कई सप्लायर्स ने निर्माणकार्य रोक दिया है. अब हालात ये हो गए हैं कि कंपनी अपने बकाया बिल संपत्ति बेचकर चुका रही है. अब समझते हैं कि इस कंपनी पर आए इस आर्थिक संकट का कारण क्या है और इसका असर दुनिया पर क्या होगा-

इतनी बड़ी समस्या कैसे बनी एवरग्रैंड
1996 में बनी और करीब एक दशक पहले कारोबार के सुनहरे दौर से गुजर रही कंपनी बोतल बंद पानी बेचा करती थी, चीन की सबसे अच्छी फुटबॉल टीम की मालिक थी और इसका दखल सुअर पालन में भी था. विस्तार इस कदर हुआ कि कंपनी ने इलेक्ट्रिक कार भी बनाना शुरू कर दिया. हालांकि, आज वही कंपनी बैंकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है.

कंपनी के संस्थापक शू जियायिन चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कॉन्स्युलेटिव कॉन्फ्रेंस के सदस्य थे. यह सियासी लोगों का एक खास समूह था. शू के बड़े संपर्कों के चलते ही शायद लेनदारों को कंपनी में पैसा लगाने का भरोसा तैयार हुआ. अब वक्त ऐसा गया कि एवरग्रैंड ने चुकाने की क्षमता से ज्यादा कर्ज ले लिया है. हाल ही के दिनों में कंपनी के खिलाफ कई घर खरीदने वालों ने मुकदमे दायर किए हैं. वे उन अपार्टमेंट्स के पूरे निर्माण का इंतजार कर रहे हैं, जिनके लिए वे आंशिक रूप से भुगतान कर चुके हैं. कंपनी को अरबों डॉलर के बिल चुकाने हैं.

इतनी बड़ी परेशानी में कैसे फंसी कंपनी
चीन में एवरग्रैंड आक्रामक रूप से बढ़ती रही और चीन की सबसे कंपनी के प्रयास में 30 हजार करोड़ डॉलर से ज्यादा का कर्ज ले लिया. बीते साल बीजिंग ने बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों की तरफ से ली गई रकम को नियंत्रित करने के लिए नए नियम लागू किए. इन नए नियमों के चलते कंपनी को पैसों का आवक सुनिश्चित करने के लिए संपत्तियों को छूट के साथ बेचना पड़ा. अब कंपनी अपने लिए हुए कर्ज पर ब्याज देने के लिए संघर्ष कर रही है. इन अनिश्चितताओं के बीच इस साल कंपनी के शेयर करीब 85 फीसदी गिर गए हैं. कई क्रेडिट एजेंसी ने इसके बॉन्ड्स को भी डाउनग्रेड कर दिया है.

क्या होगा अगर एवरग्रैंड की गिरावट का असर
कंपनी की परेशानियों के कई अहम कारण हैं. पहला कई लोगों ने एवरग्रैंड के प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही प्रॉपर्टी खरीद ली थी. ऐसे में अगर कंपनी डूबती है, तो उनकी रकम भी डूबेगी. एवरग्रैंड के साथ कारोबार करने वाली डिजाइन कंपनियां, सप्लायर्स भी बड़े नुकसान के जोखिम का सामना कर रहे हैं. इस कंपनी की गिरावट का असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अगर एवरग्रैंड डिफॉल्ट हो जाती है, तो बैंक और उधार देने वाली दूसरी संस्थाएं कम कर्ज बाटने पर मजबूर हो सकती हैं. इससे क्रेडिट क्रंच आ सकता है, जहां कंपनियां कम दरों पर रकम हासिल करने में मुश्किलों का सामना करेंगी. इसके चलते वे कंपनियां जो रकम हासिल नहीं कर पा रही हैं, वे बढ़ नहीं पाएंगी और हो सकता है कई काम करना ही बंद कर दें. इसका प्रभाव विदेशी निवेशकों पर भी पड़ सकता है.

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेशकों को डर है कि अगर एवरग्रैंड गिरती है, तो उनका लगाया हुआ सारा पैसा गायब हो जाएगा. बीजिंग ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वे अब इससे विदेशी और घरेलू बॉन्ड धारकों को जमानत देना नहीं चाहते. अगर दिवालियापन की कार्यवाही होने की स्थिति में वे कंपनी की संपत्ति हासिल करने वाले लेनदारों की सूची में सबसे नीचे होंगे.

Tags: China, Evergrande





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