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Fighting asthma and infrastructural challenges Arun Rayudu want to win India first gold medal at the Asian Games in roller skating


नई दिल्ली. अरुण कुमार रायडू विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश के एक भारतीय आर्टिस्टिक रोलर स्केटर हैं. वह एक एशियाई सिल्वर मेडल विजेता हैं. वह 2014 से टीम इंडिया के लिए खेल रहे हैं. उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ फिगर स्केटर्स में से एक माना जाता है और 2017 से आंध्र प्रदेश रोलर स्केटिंग टीम के कप्तान हैं. जन्म से अस्थमा रोगी अरुण कुमार रायडू ने अपनी हिम्मत और लगन के दम पर इस खेल में अपना नाम बनाया है. अरुण रायडू पिछले 14 वर्षों से राष्ट्रीय चैंपियन हैं और अब उनका लक्ष्य अगले एशियाई खेलों में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाना है.

प्रश्न: आज हर व्यक्ति क्रिकेट के पीछे भाग रहा है, तो आपके जेहन में रोलर स्केटिंग का विचार कैसे आया, आपकी प्रेरणा कौन बना?

जवाबः स्केटिंग से मेरा रिश्ता बहुत छोटी सी उम्र में शुरू हो गया था. इस खेल से मेरा पहला परिचय उस वक्त हुआ, जब मेरी उम्र तीन साल थी. मैं खेलों की लोकप्रियता से बहुत वाकिफ नहीं था. मैं यह भी नहीं जानता था कि खेलों को किस नजर से देखा जाता है. बच्चा होने के कारण मुझे स्पीड रोमांचित करती थी. जब मैं कार में सवार होता तो यही देखता कि कौन किस गति से जा रहा है. इसी चीज ने मुझे प्रेरित किया. मैंने अपने अभिभावकों से इस खेल में जाने की इजाजत मांगी. मेरे अभिभावकों ने मेरा रजिस्ट्रेशन स्केटिंग अकादमी में करा दिया.

प्रश्न: अस्थमा होने के बावजूद आपने खेलों में जाने का रिस्क क्यों लिया?

जवाब: मैं जन्म से ही अस्थमा का रोगी हूं. यह रोग मुझे अपने दादा से विरासत में मिला है. बचपन में मुझे बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था. मैं बिना सांस फूले थोड़ी-सी भी आइसक्रीम नहीं खा पाता था. स्वाभाविक रूप से मैंने बहुत से डॉक्टरों से सलाह ली. एक डॉक्टर ने यह सुझाव दिया कि मैं किसी खेल में या अन्य गतिविधि में शामिल हो जाऊं ताकि मुझे शारीरिक ताकत मिलती रहे. अस्थमा होने से विरोधी खिलाड़ी को बेनिफिट मिलता है. खासतौर पर सर्दी का मौसम अस्थमा रोगियों के लिए परेशानी वाला होता है.

प्रश्न: जब आप इस खेल में आए तो आपके परिवार की क्या प्रतिक्रिया थी?

जवाब: मेरा परिवार हमेशा सपोर्टिव रहा. उन्हीं की वजह से इस खेल के प्रित मेरा जुनून है. हां, मेरी मां ने मुझे प्रोत्साहित नहीं किया. वह चाहती थीं कि मैं कहीं कोचिंग करूं. इससे मैं फिजिकली फिट रह सकता था. इस खेल को बहुत अधिक मान्यता न मिलने के कारण ही फंडिंग में या किसी तरह की सहायता में दिक्कत आती है. सरकार भी बहुत कम सहयोग करती है. मेरा परिवार अब हर तरह की मदद करता है.

प्रश्न: आपसे या खेल से जुड़ा कोई किस्सा, जो आप शेयर करना चाहें, जिसे सुनकर भावी पीढ़ी प्रभावित हो सके?

जवाब: जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि 2018 में मेरा कंधा चोटिल हो गया था. मैं छह महीने ट्रेनिंग से बाहर रहा. वह मेरे लिए बहुत बुरा समय था. आप जो करना चाहते हैं, वह ना कर सकें, इससे बुरा कुछ नहीं होता. मैं इस खेल से गहरे तक जुड़ा हूं, देश को गौरव दिलाने की मेरी इच्छा ने मेरी वापसी कराई. आज मैं कलात्मक रोलर स्केटर हूं.

प्रश्न: आप किस तरह की रोलर स्केटिंग करते हैं? इस खेल के संदर्भ में आप सरकार से क्या अपील करना चाहते हैं?

जवाब: मैं आर्टिस्टिक रोलर स्केटर हूं. स्केटिंग का यह प्रारूप मूल रूप से पहियों पर जिम्नास्टिक है. इसमें मुझे अपने पार्टनर को उठाने के अलावा भी कई स्टंट्स करने पड़ते हैं. मैं सरकार से यही अपील करना चाहता हूं कि रोलर स्केटिंग को अन्य खेलों की तरह मान्यता मिले. जिस तरह अन्य खिलाड़ियों को फंडिंग की जाती है, उसी तरह रोलर स्केटर को भी फंडिंग हो. हमें प्रभावशाली बुनियादी ढांचा मिले ताकि हम ठीक से प्रशिक्षण ले सकें. अधिकांश अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में, जहां हम परफॉर्म करते हैं, वुडन फ्लोर होता है. उसका टेक्स्चर- यह ट्रेनिंग के दौरान इस्तेमाल टेक्चर से बहुत अलग होता है. यहां तो कई बार सीमेंट का फ्लोर होता है. मैं भारत सरकार से यह अनुरोध करता हूं कि हमें प्रशिक्षण के लिए उचित प्लेटफॉर्म मुहैया कराए जाएं ताकि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करके भारत का गौरव बढ़ा सकें.

प्रश्न: आपकी विश्व में इस वक्त क्या रैंकिंग है, अंडररेटेड स्पोर्ट्स रोलर स्केटिंग में आप अपना भविष्य कहां देखते हैं?

जवाब:  2017 में अंतिम बार मैंने अंडर 19 कैटेगरी में अंतराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लिया था. मेरी रैंकिंग 5 थी. 2018 में मेरा एक एक्सीडेंट हो गया. मेरा दायां कंधा डिसलोकेट हो गया. मैं यह स्वीकार करता हूं कि वह मेरे लिए मुश्किल समय था. लेकिन मैं लड़ा और एशियन गेम्स 2018 में सिल्वर मेडल जीता. उस समय एशिय में मेरी रैंकिंग 2 थी. 2019 में मुझे वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेना था, लेकिन मैं फिर चोटिल हो गया. 2020 में मेरी वापसी की योजना थी, लेकिन कोविड-19 की वजह से एशियन गेम्स रद्द हो गए. 2021 में भी यह संभव नहीं हो पाया. लिहाजा 2021 में टीम में अपना नाम होने के बावजूद नैतिकता की आवाज पर मैंने अपना नाम वापस ले लिया. अब मैं 2022 के एशियन गेम्स में भाग लूंगा. बेशक भारत में रोलर स्केटिंग अंडर रेटेड खेल है क्योंकि इसका मूल यूरोप में है. लेकिन हाल ही में भारत में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ी है. 19 वें एशियन गेम्स में स्केटिंग को शामिल किया गया था. अब 2022 में यह प्रतियोगिता होगी.

प्रश्न: अब तक आपने कितने मेडल जीते हैं, स्केटिंग प्रतियोगिताओं में आप किस स्तर तक पहुंचे हैं?

जवाब: मैं राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग ले चुका हूं. मैंने पांच अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया, इनमें से तीन एशियन चैंपियनशिप थीं और दो वर्ल्ड चैंपियनशिप. मैंने 14 नेशनल चैंपियनशिप और 16 राज्य स्तर की प्रतियोगितओं में भी भाग लिया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैंने 2 सिल्वर और एक कांस्य पदक जीता. राष्ट्रीय स्तर पर मुझे 14 गोल्ड,16 सिल्वर और 13 कांस्य पदक मिले. राज्य स्तर पर मुझे 24 गोल्ड, 15 सिल्वर और 14 कांस्य पदक मिले.

Tags: Arun Kumar rayudu, Asian Games





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