China warns america on taiwan question in rome amid tensions


बीजिंग. अमेरिका और ताइवान सेना (Taiwan Army) के बीच बढ़ती नजदीकी चीन (China) के लिए चिंता का सबब है. ताइवान ने पहली बार स्‍वीकार किया है कि अमेरिकी सैनिक उसकी सेना को प्रशिक्षण दे रहे हैं. दोनों सेनाओं के बीच चल रहे सैन्‍य प्रशिक्षण से चीन काफी बेचैन है. इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ताइवान की लोकतांत्रिक सफलता को देखते हुए संयुक्‍त राष्‍ट्र का सदस्‍य बनाए जाने की सिफारिश की है. अमेरिका ने यह कदम तब उठाया है, जब चीन ने ताइवान को एकजुट करने के लिए सारे घोड़े खोल दिए है. ऐसे में चीन (China) ने शनिवार को लिथुआनिया (Lithuania) और यूरोपीय अधिकारियों (European officials) को ताइवान (Taiwan) और बाल्टिक देश (Baltic country) द्वारा पारस्परिक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने के फैसले को लेकर चेतावनी दी है.

बीजिंग (Beijing) ने कहा है कि इससे संबंधों में खटास आ सकती है. चीन ने अगस्त में कहा कि लिथुआनिया बीजिंग में अपने राजदूत को वापस बुला ले. साथ ही इसने कहा कि वह विनियस (Vilnius) में मौजूद चीन के राजदूत को भी वापस बुलाएगा. दरअसल, ताइवान ने घोषणा की कि उसके कार्यालय को लिथुआनिया में ताइवान का प्रतिनिधि कार्यालय कहा जाएगा.

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यूरोप (Europe) और अमेरिका (America) में स्थित ताइवान कार्यालय (Taiwan Offices) द्वीप के रेफरेंस का इस्तेमाल करने से परहेज करते हैं. इसके बजाय वे ताइवान की राजधानी ताइपे (Taipei) के नाम का इस्तेमाल करते हैं. चीन ताइवान (China-Taiwan Relations) को अपने देश का हिस्सा मानता है. वहीं, लिथुआनिया ने कहा कि इस साल की शुरुआत में उसने ताइवान (Lithuania Taiwan Relations) में एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की योजना बनाई. ये इस छोटे से यूरोपीय देश का ऐसा निर्णय रहा, जिससे बीजिंग आगबबूला हो उठा.

इधर अमेरिका ने चीन को स्‍पष्‍ट संदेश दिया है कि हमले की स्थिति में वह ताइवान की सुरक्षा करेगा. बाइडन प्रशासन का संकेत साफ है कि युद्ध की स्थिति में अमेरिकी सेना ताइवान का साथ देंगी. इतना ही नहीं अमेरिका ने एक कदम आगे जाकर ताइवान को संयुक्‍त राष्‍ट्र की सदस्‍यता की वकालत की है. ताइवान को लेकर यह अमेरिकी दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव है. अगर ताइवान को लेकर अमेरिकी रणनीति पर गौर करें तो इसमें समय-समय में बदलाव होता रहा है, लेकिन बाइडन प्रशासन ने ताइवान पर अपनी स्‍पष्‍ट नीति का ऐलान किया है.

दरअसल, ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति सदैव एक जैसी नहीं रही है. ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति में एक तरह की रणनीतिक अस्‍पष्‍टता दिखाई देती रही है. 1979 में तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जिमी कार्टर ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध स्‍थाप‍ित करने के लिए ताइवान के साथ आधिकारिक संबंध समाप्‍त कर लिए थे. उस वक्‍त अमेरिकी कांग्रेस ने ताइवान र‍िलेशंस एक्‍ट पारित किया था. यह कानून इस बात की इजाजत देता था कि अमेरिका ताइवान को रक्षात्‍मक हथ‍ियारों की बिक्री कर सकता था.

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चीन ने क्या कहा?
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन (Wang Wenbin) ने मंत्रालय की वेबसाइट पर एक बयान में कहा, चीन उन देशों के बीच आधिकारिक संपर्कों का पूरी तरह से विरोध करता है, जिनके चीन और ताइवान में अधिकारियों के साथ राजनयिक संबंध हैं. वांग ने कहा, हम लिथुआनियाई सरकार से चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करते समय की गई गंभीर राजनीतिक प्रतिबद्धताओं का पालन करने और अपरिवर्तनीय गलत निर्णय न लेने का आग्रह करते हैं. उन्होंने कहा, यूरोपीय पक्ष को एक सही स्थिति अपनानी चाहिए और चीन-यूरोपीय संघ संबंधों के स्वस्थ विकास में हस्तक्षेप को रोकना चाहिए.

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