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OPERATION DANGAL violence increasing in wrestling due to drugs sushil kumar


अरुण सिंह

नई दिल्ली. कुश्ती (Wresling) भारत के प्रचिलित खेलों में से एक है. लेकिन पिछले दिनों हुई कुछ घटनाओं ने इस खेल को बदनाम कर दिया है. ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार (Sushil Kumar) जूनियर रेसलर की हत्या के आरोप में अभी जेल में हैं. वहीं महिला रेसलर निशा दहिया की हत्या उनके ही कोच पवन ने कर दी. इसके अलावा कई अन्य घटनाओं ने खिलाड़ियों पर सवाल उठाए दिए हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ड्रग्स को बताया जा रहा है. अवैध अखाड़ों में जांच नहीं होने के कारण खिलाड़ी जल्दी नाम कमाने के चक्कर में ऐसे कदम उठा रहे हैं.

न्यूज18 ने इस मामले को लेकर एक EXCLUSIVE रिपोर्ट तैयार की है. इस स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया है कि आखिर कैसे खिलाड़ी ड्रग्स की जाल में फंस रहे हैं. स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के कुश्ती के चीफ कोच महाबीर प्रसाद ने कहा कि रेसलिंग के खिलाड़ियों में गुस्स के पीछे ड्रग्स मुख्य वजह है. उन्होंने कहा, ‘एजुकेशन की कमी के कारण खिलाड़ी ऐसा कर रहे हैं. अधिकांश पहलवान कम पढ़े लिखे होते हैं.’

सुशील कुमार पर कही बड़ी बात

महाबीर प्रसाद ने इस बीच सुशील कुमार को लेकर बड़ी बात कह दी. उन्होंने कहा कि ओलंपिक में जाने से पहले वह तीन महीने तक मेरे साथ रहा. उसने भी बाद में एनर्जी ड्रिंक अधिक लेनी शुरू कर दी. इस कारण वह थोड़ा अग्रेसिव हो गया. उन्होंने बताया कि उसे शोहरत, मान-सम्मान और पावर सब मिल गया था. लेकिन सही लोग उसके आस-पास नहीं थे. इस कारण उसने यह कदम उठाया है. महाबीर प्रसाद की मानें तो रेसलिंग से जुड़े खिलाड़ियों के शिक्षित ना होने की वजह से वो बहक जाते हैं और सुशील कुमार के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. महाबीर को 2014 में द्रोणाचार्य पुरस्कार मिल चुका है.

सफलता नहीं मिलने पर होती हैं गलतियां

सीनियर कोच ओपी दहिया को भी 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार मिल चुका है. उन्होंने बताया कि खेल में पद, पैसा और सम्मान इतना बढ़ गया है कि अब हर कोई इस खेल में आना चाहता है और जिसको सफलता नहीं मिलती है तो गलतियां कर बैठता है. उन्होंने बताया कि ड्रग्स तो हमारे रेसलिंग में सबसे बाद में आया. अगर कोई डायटीशियन अच्छे लेवल का होगा तो वो ड्रग्स को मेंटेन रखता है. कोई दिक्कत नहीं होने देता. लेकिन एक बार जो इस चक्कर में फंस जाता है, फिर इससे बाहर नहीं निकल पाता है.

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लोकल कोच भी शामिल हैं इसमें

वहीं सोनीपत में लड़कियों के लिए इकलौती रेसलिंग अकादमी चलाने वाले नरेंद्र सूरा ने कहा कि कोच और पैरेंट्स यदि जागरूक हैं तो वो इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. उन्हाेंने बताया कि लेकिन दिक्कत तब अधिक आती है जब पैरेंट्स ये चाहता है कि मेरे बच्चे को किसी तरह चैंपियन बना दो. इसमें कोच का भी रोल अहम होता है. लोकल लेवल पर कुश्ती में जो ड्रग्स का दीमक लगा है, उसमें कुछ गैर-पेशेवर कोच भी शामिल हैं.

Tags: Nisha Dahiya, Olympics, Sports Authority of India, Sports news, Sushil kumar, Wrestler





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